कॉलेज की फीस से शुरू किया गारमेंट का बिजनेस, अब है करोड़ों का टर्नओवर

कॉलेज की फीस से शुरू किया गारमेंट का बिजनेस, अब है करोड़ों का टर्नओवर

पिछले दो-तीन सालों में इंजीनियरिंग और एमबीए पास कर युवा मल्टीनेशनल कंपनीज में नौकरी करने की जगह स्टार्टअप में ज्यादा रुचि रख रहे हैं, लेकिन आज से सात आठ साल पहले अधिकांश लोगों के लिए बिजनेस शुरू करना आसान नहीं था। 

उस समय शहर के पीयूष वरगाड़िया ने 2010 में यूके से एमबीए की पढ़ाई छोड़ गारमेंट का स्टार्टअप शुरू करने का निर्णय लिया। उस समय उन्हें घरवालों के अलावा दोस्तों ने भी नौकरी करने की सलाह दी, लेकिन वो पीछे नहीं हटे। आज उनकी कंपनी का टर्नओवर सालाना 2 करोड़ रुपए है। इनके इंदौर, देवास और विदिशा में 9 फ्रेंचाइजी हैं।

नईदुनिया से बातचीत में पीयूष ने बताया कि जब इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद मैं यूके एमबीए करने गया तो वहां मुझे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होने लगीं। एक महीने हॉस्पिटल में रहा। मां ने कहा कि वापस आकर यहीं से एमबीए कर लेना। वापस आने के बाद मैं जब एमबीए के लिए पुणे गया तो वहां मैंने एक रिश्तेदार का गारमेंट का बिजनेस देखा। वहीं से गारमेंट बिजनेस का आइडिया आया।

 मैंने निश्चय कर लिया कि अब एमबीए नहीं करके इसी फीस से खुद का स्टार्टअप शुरू करूंगा। इंदौर वापस आकर सभी बड़े ब्रांड्स के प्रोडक्ट्स की पूरी स्टडी की। सभी केलकुलेशन के बाद इस नतीजे पर पहुंचा कि अच्छे फेब्रिक की शर्ट जो ब्रांड के नाम से 2 से 3 हजार रुपए तक बेची जाती है, उसे प्रॉफिट हटाने के बाद 700 से 1000 रुपए तक बेचा जा सकता है। आम लोग भी अच्छा प्रोडक्ट ले सकें, इसलिए कीमत कम रखना सबसे जरूरी है।

पीयूष ने बताया कि पहले साल 50 हजार रुपए से बिजनेस की शुरुआत की। कुछ साल ज्यादा प्रॉफिट नहीं हुआ, जो भी बचता था उसे बिजनेस में लगा देता था, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। एक समय ऐसा आया, जब प्रॉफिट शुरू हो गया। पहले सिर्फ एक ब्रांड था, आज 3 है, जिनमें कंपलीट मैंस कलेक्शन है। पीयूष कहते हैं कि आज बाजार में इतने ब्रांड्स उपलब्ध हैं कि मार्केट में बने रहने के लिए अच्छी क्वालिटी देना सबसे जरूरी है।

 कोई भी प्रोडक्ट मार्केट में आने से पहले उसकी पूरा क्वालिटी चैक करवाता हूं। वॉश करने पर प्रोडक्ट में किसी तरह का बदलाव न आए, रंग न जाए, स्ट्रेच न हो। पहले जब पीयूष ने बिजनेस शुरू किया था तो वो अकेले थे, लेकिन आज उनके पास 40 से अधिक लोगों का स्टाफ है। एक महीने में उनके ब्रांड के 4000 से अधिक शर्ट्स बिकते हैं।

Source : naidunia
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